Saturday, 3 December 2016

शहर मे मेरा गाँँव खो गया है

वह बरगद का पेड
वह बचपन के झुले 
वह मिट्टी के खिलौने 
वह गाँव के मेले

वह ताँगे की सवारी
वह पुरानी बैलगाडी
वह गाँव की खुशहाली
वह हरी - भरी हरियाली
वह चिडियोँ का चहकना
वह फूलोँ का महकना
वह मिट्टी की खुशबू 
वह बारिश का आना


वह पनचखी का आटा
वह चुल्हे की रोटी
वह स्कूल से आना 
वह माँ के हाथ का खाना
वह खेतोँ मे जाना 
वह हल लगाना 
वह गायेँ चुगाना
वह घास ले के आना

वह मेल मिलाप से रहना
वह एक दुसरे के काम आना
वह मिल बाँट के खाना
वह प्रेम और भाईचारा का गाँव 
आज शहर मे तब्दिल हो गया है
शहर की उँची उँची इमारतोँ  मे 
ओ मेरा गाँँव कँँही खो गया है :( 

© Vinod Jethuri on 30/11/2016


Thursday, 24 November 2016

सोनम गुप्ता बेवफा है - नोटो पर न लिखेँ

500 और 1000 के नोटोँ के बँद होने के बाबजुद भी
जितना धन न बचा पाए । 
अफसोस कि .... 
उससे जादा तो सोनम गुप्ता की 
बेवफाई मे बर्बाद हो गए ॥ 
मजबूरन रिजर्व बैक़ँ को आदेश देना पडा कि ... 
जो भी नोट पर लिखेगा ..
उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी 
नतिजा यह हुआ कि 
भारत की करेसीँ की तो जैँसी तैसीँ 
विदेशी करेँसियोँ की भी वाट लग गयी 
फिर जा के सोनम गुप्ता की माँ सामने आयी 
और बोली ..
मेरी बेटी ने नही की बेवफाई 
ओ तो आवारा आशिक था 
जिसने यह साजिश रचाई 
फिर आशिक के घर से  
प्रतिक्रिया आयी कि ....
सोनम गुप्ता ने की बेवफाई 
सोनम गुप्ता ने की बेवफाई 

चाहे हुई वफाई या, किसी ने की बेवफाई
पर इस तरह से नोटो पर न करो लिखाई 

@विनोद जेठुडी - 24/11/2016

Sunday, 3 July 2016

घोटाले पे घोटाला


हम सभी भारतियोँ के लिए यह गर्व कि बात है कि आज जब विश्व के और देशोँ की अर्थ ब्यवस्था जंहा डमाडोल रही है वँही हमारे देश की अर्थ ब्यवस्था दिन प्रतिदिन मजबूत होती जा रही है और देश प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ रहा है ।
इस बात ने मुझे सोचने पे मजबूर कर दिया कि आखिर इन दो सालो मे येसा क्या हुआ जो पहले नही होता था या जो पहले क्या होता था जो शायद अब नही हो रहा है तो मुझे जबाब मिला “घोटाला” 
पहले घोटाले पे घोटाले सुनने को मिलते थे और उन्ही घोटालोँ को मैने एक कविता के माध्यम से आपके सम्मुख रख रहा हूँ ।
अगर हमारे देश मे “घोटाले” (corruption) भ्रष्टाचार बन्द हो जाए तो भारत को फिर से सोने की  चिडिया बनने से कोई नही रोक सकता ।

घोटाले पे घोटाला, घोटाले पे घोटाला
घोटाले का घोटाला, घोटाले मे भी घोटाला

कलमाडी ने कौमनवेल्थ का, जूस बना के पी डाला
2 जी का आन्नद ले गये, कन्नेमोझी और ए राजा
अपनो को ही बेच दिया था, देश का किमती ओ कोयला
जँहा देखो वँहा हो रहा था, घोटाले पे घोटाला

अच्छे अच्छे नामोँ का तो अर्थ ही इन्होने बदल डाला
आदर्श, शारदा, सत्यम जैसे नामोँ को कलँकित कर डाला
वक्फ बोर्ड की भूमी और स्टीँग का ओ तहलका
जँहा देखो वँहा हो रहा था, घोटाले पे घोटाला

चौपर तो उडता था लेकिन, ट्रेन, ट्रक तक उडा डाला
शहिदोँ के ताबूत खरिदे, उसमे भी देखो घोटाला
देश के रक्षा सौदोँ मे बोफोर्स हमे आज याद आया
जँहा देखो वँहा हो रहा था घोटाले पे घोटाला

सँसद के अन्दर ले गये थे पैसोँ के भरके ओ थैला
बोट के बदले नोट दिये थे, दिया उन्होने हवाला
लख्खु पाठक, हर्षद मेहता, सुदीप्तो घोष का बोलबाला
जँहा देखो वँहा हो रहा था घोटाले पे घोटाला

शिक्षा मे भी भिक्षा ले के फँसे बेचारा चौटाला
डी एल एफ की जमीन दिला दी, अपना ही था घरवाला
दुनिया वाले भाड मे जाये, खुश रहो तूम जवाईँ राजा
जँहा देखो वँहा हो रहा था घोटाले पे घोटाला

चँदा ले के चाँदनी मे सफेद किया क्या कुछ काला
मुझे तो लगे इसमे भी था  कुछ न कुछ तो घोटाला
काली रात की काली कमाई का पता अभी तक न चल पाया
जँहा देखो वँहा हो रहा था, घोटाले पे घोटाला

राज भवन मे बैठ बैठ के किया उन्होने ऊलाला
क्रष्ण कन्हैया बने रहे और रचते रहे राशलीला
मरने की जब बारी आयी, अब जा के हुआ जयमाला
जहँ देखो वँहा हो रहा था, घोटाले पे घोटाला

काला धन उनका आज, सड रहा है स्विशशाला
अब ओ सब पछताएँगे जब होगा उनका मुँह काला
बडी मुस्किल से जोडा होगा, करके एक एक घोटाला
जँहा देखो वँहा हो रहा था घोटाले पे घोटाला
  
घोटाले पे घोटाला, घोटाले पे घोटाला
घोटाले का घोटाला, घोटाले मे भी घोटाला
जँहा देखो वँहा हो रहा था घोटाले पे घोटाला
जँहा देखो वँहा हो रहा था घोटाले पे घोटाला

© विनोद जेठुडी, ०३/०७/२०१६ 

Tuesday, 22 December 2015

पुराने कपडोँ के दान हेतु निवेदन



इस्तेमाल में न आने वाले कपड़ों को यों ही न फेंक देना । 
सड़क किनारे ठंड से ठिठुकते गरीबों  को दान दे देना ॥ 

Thursday, 10 December 2015

विश्व मानव अधिकार दिवस की सुभकामनायेँ

किसानोँ की तो उम्र गुजर गयी
कर्ज देते सौकारोँ की............।  
बात बडी बडी करते हो जी
मानवता के अधिकारोँ की ॥

क्या कभी गुँज सुनाई दी... ?
बम और गोली के धमाकोँ की  
बात करने से क्या फायदा
मानवता के अधिकारोँ की

अपने को ही उडा देता कोई
भीड मे जाके हजारोँ की
उन्ही का मुखिया बात करता फिर्
मानवता के अधिकारोँ की

कहाँ गयी दया भाव इन
ईंसानियत के ईंसानो की
बात करने से कुछ नही होता
मानवता के अधिकारोँ की

अकेले चलने मे डर लगता है
स्तिथी ये है महिलाओँ की
कँहा गयी ओ स्वतंत्रता हमारी
मानवता के अधिकारोँ की

बिन खाये ही सो जाते कुछ
चादर नही सर ढकने की
बात बडी बडी करते हो जी
मानवता के अधिकारोँ की

कोई अपनी जान गँवाता  
क्योँकि इच्छा थी कुछ खाने की
ये भी कैसी शोषणता है ?
मानवता के अधिकारोँ की

स्वास्थ्य, शिक्षा, विजली, पानी
अभाव है बुनियादी चीजो की
आस लगाये बैठेँ है जी ..
अपने इन अधिकारोँ की

देश मे बढती गाडियोँ से...
प्रदुशित हवा हुयी, शहरोँ की
अमिरोँ को जो शौक है लगता
शोषण गरिबोँ के अधिकारोँ की  

घर मे ही जो कैदी बन गयी  
ब्यथा सुनो उस नारी की
मुझको भी दो हक जीने का
मानवता के अधिकारोँ की

मानवता मेरा पहला धर्म है
धार्मिक पुस्तक है सतकर्मो की
आओ मिलकर आवाज उठायेँ
मानवता के अधिकारोँ की

सहयोग करेँ सब मिलकर के  
उन, जरुरत मँद ईसाँनो की
समानता से पालन हो
मानवता के अधिकारोँ की

विनोद् जेठुडी
10 दिसम्बर, 2015
(विश्व मानवता दिवस पर विशेष)

Tuesday, 10 November 2015

दीपावली की सुभकामनाएँ - शुभ दीपावली

बुराईय़ोँ के अन्धियारे मे
अच्छाई का दीप जलाइँगे
देखो दिवाली आयी है....
हम जश्न खुब मनायेँगे

प्रकाश के इस पावन पर्व पर
परिवर्तन कुछ तो लायेँगे.....
पर्यावरण अपना प्रभावित न हो
मिट्टी के दिये जलायेँगे

स्वदेशी निर्मित वस्तुओँ से
घर अपना सजायेँगे.........
सुन्दर, स्वर्णिम देश हो अपना
येसा भारत बनायेँगे
  
अनेकता मे एकता का
सन्देश कुछ योँ दिलायेँगे
कि हिन्दु- मुसलिम, सिख, इसाई
मिलकर दीवाली मनायेँगे

" सुभ: दिपावली के सुभ अवसर पर...............
यह हमारी सुभकामना कि, आप बडे धनवान हो
सुख, सम्रधी, धन, वैभव और यश किर्तीमान हो
दानिय़ोँ के दानी और येसा आपका ज्ञान हो
जिस जगह पडे कदम आपके, वहाँ बडा सम्मान हो"  

विनोद जेठुडी - "समूण"

Sunday, 26 April 2015

अच्छा करो तो बुरा ही होगा

सच्चे मन से तुझको ध्याया
गुणगान सदा ही तेरा गाया
दया-धर्म के पथ पर चल के
परोपकारिता का दीप जलाया
सच्चाई के पथ पर चल के
औरों को भी चलना सिखाया
गल्ती कौन सी हुयी थी मुझसे ?
जो ऐसी मुझको सजा दिलाया
अच्छा करो तो बुरा ही होगा
ऐसा किसी को बोलते पाया 
विश्वास मुझे होने लगा है
क्योंकि,………………
प्रमाण जब सामने आया । 
कलयुग शायद आ ही गया है
सच्चाई पे बुराई जीतने लगा है
बुराई के पथ पर चल नहीं सकता
क्योकि जीवन अभी बहुत बड़ा है
विश्वास कायम तुझ पर अभी भी 
शायद ओ परिक्षा थी हमारी 
इससे भी बुरा होने वाला था 
इसमे ही टाल दिया है । 

सर्वाधिकार सुरक्षित @ विनोद जेठुडी 

हैप्पी 4थ एनीवर्सरी

कभी खुशी तो कभी गम कभी तुमसे तकरार हुआ
पल पल मे पल गये, हर पल मे हमेँ प्यार हुआ
पहला, दुसरा, तीसरा और आज चौथा साल हुआ
सँग तुम्हारे जिँदगी मे,  और भी खुशहाल हुआ

 डेडीकेटेड टु माई स्वीट वाईफ 
@ विनोद जेठुडी, 14 अप्रैल, 2015 

सुखी जीवन का जीना

चाहे फूलोँ के महल मे हो आशियाना
हो चाहे झुग्गी- झोपडी मे रहना
नीन्द जँहा सकून की आ जाए मेरे दोस्तोँ
वही है सुखी जीवन का असली मे जीना 

सर्वाधिकार सुरक्षित @ विनोद जेठुडी 

Thursday, 23 April 2015

किसान रैली मे किसान गजेन्द्र की आत्महत्या


कल दिनाँक 22 अप्रैल 2015 को आम आदमी पार्टी की रैली मे एक किसान गजेन्द्र सिँह की आत्महत्या का ममला मानवता को शर्मशार करने वाली घटना है । किसान गजेन्द्र सिँह आम आदमी का सक्रिय कार्यकर्ता बताया जाता है और रैले के लिये आमंत्रण मिलने पर ही ओ दौसा जिला, राजस्थान से वँहा आया था ।
इस आत्महत्या के लिए आम आदमी पार्टी के साथ साथ वँहा पर तमाशा देख रही समस्त जनता, मिडिया व पुलिस भी जिम्मेदार है । सब लोग तमाशा देखते रहे और किसी के मन मे भी इतनी सी एंसानियत नही जागी कि उसे पेड से निचे निकाला जाय ।
आम आदमी पार्टी आम आदमी होने का ढकोसला करने वाले अरविन्द केजरीवाल वँहा से मात्र 30 सेकिंड की दुरी पर भाषणवाजी करते रहे और पल-पल की खबर लेते रहे, पुलिस तथा दुसरे लोगोँ को जिम्मेदार बताने वाले क्या आपकी  इतनी जिम्मेदारी नही बनती कि खुद चले जायेँ या अपने किसी कार्यकर्ता को उसे निचे निकालने को कहा जाय ? और अगर खुद भी चले जाते तो कौन सी उनकी पद और गरिमा कम हो जाती। फिर जब घटना घटित हो जाती है बोलतेँ है कि पुलिस हमारे कँट्रोल मे नही ।
कुमार विश्वास कहते है कि “लटक गया” और उनके चेहरे पर कोई भी दुख का भाव प्रकट नही होता जैसे मानो उन्हे पहले से ही इस बात की खबर थी । क्योँ उसी वक्त अपनी भाषणवाजी बँद नही की गयी और भाषण फिर भी चलता रहा ?
आशुतोष कहते है कि दिल्ली के मुख्यमँत्री को पेड पे चढ जाना चाहिये था और खुद उतारना चाहिये था आघे से अगर येसी घटना होती है तो मुख्यमँत्री जी से निवेदन करुँगा कि खुद जाये। माननिय आशुतोष जी अगर चले भी जाते तो छोटे हो जाते वैसे भी तो ओ बोलते है कि मै आम आदमी हुँ ।
सोमनाथ भारती और अलका लाम्बा को तो जैसे ट्वीट करने की बहुत जल्दी पडी थी गजेन्द्र के मरने से पहले ही श्रधाँजली दे डाली ? येसा लगता है जैसे मानो पुरी आम आदमी पार्टी को पहले से इस बात की खबर थी और कँही ये जानबुझ कर किया हुआ गेम प्लान तो नही ?  
जनता जनार्धन (तमाशा देखने वाली) बाद मे आसुँ बहाने वालोँ और विरोध मे रैली करने वालोँ जब आप सब तमाशा देख रहे थे क्या किसी के हर्दय मे दयालुता और मानवता नाम का कुछ भी अँश नही बचा जो कोई उसे निचे उतारने कि हिम्म्त करता आप सब लोग भी गजेन्द्र किसान की म्रत्यु के लिये जिम्मेदार है ।
पुलिस प्रशासन बताया जा रहा है कि मात्र कुछ दुरी पर पुलिस का एक थाना स्तिथ है और किसी ने इतना साहस नही किया कि उस बेचारे किसान को बचाया जाय । पुलिस तो बाद मे जाँच शुरु करेगी पहले घटना तो घटित हो जाने दिजिये ! जब तक घटना घटी नही तब तक हम कुछ नही कर सकते । घटना होने दो फिर जाँच शुरु होगी और फिर जाँच कमेटी बनेगी 20 साल बाद रिपोर्ट आयेगी कि जिस पेड पर ये घट्ना हुयी थी वँहा पर येसा कोई पेड है ही नही ।
मिडिया को अपने चैनल का टी आर पी जो बढाना है इस घटना को कवरेज करना है और बाद मे लिखना है सबसे पहले सबसे तेज हमने ये घटना अपने कैमरे मे कैद किया है । उसके बाद 1 हफ्ते की खबर पुरी हो गयी है अब शुरु होगा आरोप प्रत्यारोप । क्या मानवता के नाते आपकी भी जिम्मेदारी नही बनती कि थोडा सा कैमरे को किसी और को दे कर उसकी जान बचाने कि कोशिस की जाती ? तब जा के सच्चे अर्थोँ मे आपके चैनल का टी आर पी बढता ।
दुसरोँ को बोलना बहुत आसान होता है कभी अपने गिरेवान मे भी झाक लिया करेँ ।
समूण सँस्था वहाँ पर उपस्थित लोगोँ को इस हत्या के लिये जिम्मेदार मानती है जो कि गरिब, लाचार और बेबस किसान गजेन्द्र को आत्मह्त्या के लिये उकसाने का कार्य कर रहे थे । दोषियोँ के खिलाफ कडी से कडी सजा हो ये हम माँग करते है ।
सभी राजनितिक व गैर राजनितिक पार्टियोँ से विनम्र निवेदन करती है कि किसानो के हितो की आढ मे अपनी राजनिती की रोटियाँ न सेकेँ । 

विनोद जेठुडी
23.04.2015