Tuesday, 2 August 2011

अब तो सिर्फ़ रह गयी यादें

छोटे-छोटे सपने, मीठी-मीठी बातें
फोन पे बतियाना, लम्बी-लम्बी रातें
तेरे बिना कैसे जी पायेन्गे ?????
अब तो सिर्फ़ रह गयी यादें.........!

सर्वाधिकार सुरक्षित @ विनोद जेठुडी
 13th Sep 2010 @ 07:30 AM