Tuesday, 2 August 2011

मै तडप रहा हूँ रो रहा हूँ














वह भी खुश थी....
मै भी खुश था....!
एक दुसरे को पाके.....
जो भी मांगा था रब से..
वह पाया था उसमे....
बडे-बडे सपने देखे थे..
साथ जिन्दगी बिताने के
उड गये सारे सपने...
एक हवा के झोके से..!
हवा का झोँका कुछ यों आया...
कि अन्धविस्वासो की लहर मे,
मेरी सारी खुशीया ले गया....
मै तडप रहा हूँ, रो रहा हूँ...!
किसे अपनी सुनाँऊ... ?
जिसे सुनाना भी चाहुँ पर
उसे निन्द से कैसे उठाऊ ?
अर्धरात्री हो चुकी है...
नीन्द मुझे क्यों न आती ?
उसको भूलना तो चाँहु पर..
उसकी यांदे दिल से ना जाती..
कुछ सोचता हूँ, समझता समझता हूँ..
यो ही अपने दिल को,  
मनाये जा रहा हूँ.....
अगर ओ ना मिली जो तो..!
उसके बिना कैसे जी पाऊ ?

8 सितम्बर 2010 @ 23:38 PM
सर्वाधिकार सुरक्षित @ विनोद जेठुडी