Tuesday, 2 August 2011

अभिलाषा

"सुमन" से मिलने की अभिलाषा
"रुची" अपनी कुछ और है कह्ता !
"प्रार्थना" से जुडी है "आश्था"
कल-कल,छल-छल करती "सरिता" !!

घने बादलो से आयी थी "छाया"
पर फ़ंसा गयी मुझको ये "माया" !
"दिव्या" "द्रष्टि" को भी पाया
"भावना" ने मान बढाया !!

साधु बन कर पाया "दिक्षा"
सालो कि ये मेरी "तपस्या" !
घडी आयी और हुयी "परिक्षा"
कुछ दिनो बाद होगी "समिक्षा" !!

दिल मे छायी थी एक "आशा"
अन्धेरे मे भी "रोशनी" दिखता !
"किरन"मु़झको खुब है भाता
सुबह-सुबह "खुशबु" से मिलता !!

सुमन = फुल/रुची = ईच्छा/प्रर्थना = प्रेयर/सरिता = नदी/छाया = छाव/माया = पैसा/दिव्या = अद्रश्य शक्ति/
भावना = बिचार/दिक्षा = आध्यात्मिक ग्यान/तपस्या = तप/परिक्षा = ईक्जाम/समिक्षा = मुल्यांकन/आशा = उमिद/रोशनी = ऊजाला/किरन = प्रकाश/खुशबू = सुगन्ध....


सर्वाधिकार सुरक्षित © विनोद जेठुडी