Tuesday, 2 August 2011

माँ सर्वश्रेष्ठ है जग मे

कमर मे बांधे बच्चे को माँ
सर मे भारी बोझ उठाती
खुद तो भुखी  रहती है माँ
बच्चे को भर पेट खिलाती

बच्चे को छाती से लगाकर
बदन के कपडे से है ढकती
पौष की ठन्डी रातो मे माँ
खुद  गीली चादर मे सोती

बच्चे की ख़ुशी मे खुश रहती माँ
अपनी ख़ुशी वह कुछ नही चाहती
कांटा चुभे जो बच्चे को तो....
माँ को दर्द बडी जोर से होती

माँ सर्वश्रेष्ठ है जग मे..........
माँ से बढकर कोइ ना प्यारी
माँ की ममता लिख ना पाऊ
जैसे सागर की गहराई.........

अपने तन पर हमे बसाये
बच्चे का माँ बोझ उठाती
कष्ट सहे है माँ ने कितने
यह तो माँ ही है जानती

"माता पिता की सेवा करना
उनको सदा सुख ही देना......
माँ के आन्सु अगर गिरे तो
फिर सारी उम्र पछताना".....

सर्वाधिकार सुरक्षित @ विनोद जेठुडी