Friday, 12 August 2011

रक्षाबँधन



रक्षाबंधन फिर से आया, लेके खुशियां सारी
सदा खुशी तूम रहो मेरी बहना, ये दुवा हमारी
बहन की खुशियों के खातिर सदा, तत्पर है ये भाई
ईस दुनिया मे सबसे सुन्दर, बहना मेरी प्यारी
ईस दुनिया मे सबसे सुन्दर, बहना मेरी प्यारी

खुबसूरत राखी के धागे से, सजी है ये कलायी
बडी प्यार से मेरी बहना ने, मुझको है पहनायी
बांध के राखी और फिर उसने, खिलायी मुझे मिठायी
ईस दुनिया मे सबसे अच्छी, बहना मेरी प्यारी
ईस दुनिया मे सबसे अच्छी, बहना मेरी प्यारी

प्यार से ये जो राखी तूने, मुझको है पहनाई
इस धागे का फ़र्ज निभाऊ, बस इतनी है दुवाई
चाहे कितने भी आयें मेरे, रास्ते मे कठनाई
सब रिस्तो से बढकर है, रिस्ता बहन भाई
सब रिस्तो से बढकर है, रिस्ता बहन भाई

बचपन के ओ खेल तमासे, कभी हुयी लडाई
लडते-लडते पढते-पढाते, कभी हुयी पिटायी
याद आता बचपन बहना, जो संग मे बितायी
ईस दुनिया मे सबसे सच्ची, बहन मेरी प्यारी
ईस दुनिया मे सबसे सच्ची, बहन मेरी प्यारी


सर्वाधिकार सुरक्षित ©  विनोद जेठुडी
12 अगस्त 2010 @ 22:20